ओड़िशा राज्यसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत 

ओड़िशा राज्यसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत 

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

ओड़िशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिये सोमवार (16 मार्च) को हुए चुनाव में भाजपा ने बीजद और कांग्रेस को करारा झटका देते हुए तीन सीट जीत ली है। एक सीट बीजू जनता दल के खाते में गई है। विधायक खरीद फरोख्त और बीजद में खुली बगावत , क्रॉस-वोटिंग के बीच  ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल,  मौजूदा सांसद सुजीत कुमार , बीजद के संतृप्त मिश्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय  (निर्दलीय उम्मीदवार) विजेता हुए हैं। भाजपा समर्थित दिलीप राय और बीजद -कांग्रेस के साझा उम्मीदवार डॉक्टर दत्तेश्वर होता को
दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर हरा दिया। इस विजय के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने “2002 की पुनरावृत्ति” करते हुए बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक को एक बार फिर शिकस्त दी है।  
चुनाव पूर्व गणित के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को सीधे जीत के लिए 30 पहली वरीयता वोटों की आवश्यकता थी। भाजपा के पास तीन निर्दलीय विधायकों सहित लगभग 82 विधायक होने के कारण दो सीटें जीतना तय माना जा रहा था, जबकि 48 विधायकों वाली बीजद को एक सीट मिलनी तय थी।
मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को पहली वरीयता में 35 वोट मिले। जबकि बीजद के संतृप्त मिश्र को 31 वोट मिले। दिलीप राय और डॉक्टर होता को समान 23-23 वोट मिले। अतः दूसरी वरीयता में दिलीप राय ने जीत हासिल करने में सफल हो गये। इस चुनाव में कांग्रेस के तीन और बीजद के आठ विधायकों ने दलीय व्हीप को अंगूठा दिखाते हुए क्रॉस वोटिंग की। 
नवीन पटनायक ने भाजपा पर खरीद फरोख्त का आरोप लगाया तो दिलीप राय ने अपनी विजय के लिए  अन्य दलों के विधायकों के साथ भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण रिश्तों को श्रेय दिया। बीजद के क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों ने दिलीप राय को बीजू पटनायक के आदर्शों को  आगे बढ़ाने वाला नेता माना। 
गौरतलब है कि 2002 में नवीन पटनायक ने बीजद के संस्थापक सदस्य दिलीप राय को राज्यसभा के लिए टिकट देने से मना कर दिया था। तो दिलीप राय निर्दलीय के रूप में मैदान में उतर गए थे। उस समय किसी भी दल का समर्थन उनके पास नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने कांग्रेस के मोरिस कुजूर को हराकर राजनैतिक भूचाल ला दिया था। 
उस समय लगभग 15 बीजद विधायकों ने दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के करीबी माने जाने वाले राय, जिनके सभी दलों के नेताओं से अच्छे संबंध रहे हैं, ने एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीतने में सफलता हासिल की। बीजद के बागी विधायकों ने अपने दल के कांग्रेस से हाथ मिलाने को अस्वीकार करते हुए दिलीप राय को वोट दिया। 
नवीन पटनायक और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने दल के बागी विधायकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात कही है। राज्यसभा चुनावी नतीजों से राज्य में नए राजनैतिक समीकरण बनने के स्थिति बन गई है। यह समीकरण किस रूप में सामने आएंगे इसपर सबकी नजरें रहेंगी।